हरिवंश महाप्रभु ने रस भक्ति को ब्रजभाषा का उपास्य बनाया: नवनीत प्रिय दास महाराज



शुभम शर्मा की रिपोर्ट ।

वृन्दावन। गोविंद घाट स्थित अखिल भारतीय निर्मोही बड़ा अखाड़ा रास मंडल पर पंच दिवसीय श्रीमद्भक्तमाल कथा का आयोजन अग्रवाल गोटा परिवार के द्वारा महंत लाड़िली शरण महाराज के पावन सानिध्य में अत्यंत श्रद्धा व धूमधाम के साथ आयोजित किया जा रहा है। प्रख्यात भक्तमाल कथा प्रवक्ता नवनीत प्रिय दास महाराज के द्वारा भक्तों व श्रद्धालुओं को श्रीमद्भक्तमाल कथा के अन्तर्गत प्रथम दिवस पर श्री राधावल्लभ सम्प्रदाय के प्रवर्तक हरिवंश महाप्रभु के जीवन चरित्र का श्रवण कराया गया।उन्होंने कहा कि हरिवंश महाप्रभु श्याम सुंदर की वंशी के अवतार एवं राधा चरणों की प्रधानता वाली मधुर रसोपासना के आविर्भावक थे। उन्होंने उपासना,भक्ति , काव्य और संगीत आदि के क्षेत्र में क्रांतिकारी मोड़ दिए।उनका जन्म मथुरा के बाद ग्राम में वट वृक्ष के नीचे हुआ था। 

कथा व्यास नवनीत प्रिय दास महाराज ने कहा कि हरिवंश महाप्रभु को राधा रानी ने स्वयं अपने दर्शन देकर और अपनी निकुंजोपासना का मंत्र दान देकर शिष्यत्व प्रदान किया था। साथ ही उन्होंने इनको "हित" की उपाधि प्रदान की। अतः हरिवंश महाप्रभु राधारानी को अपना इष्ट व गुरु दोनों ही मानते थे।हरिवंश महाप्रभु ने संवत् 1591 में श्रीधाम वृन्दावन आकर यहां के परिक्रमा मार्ग स्थित मदन टेर पर सर्वप्रथम ठाकुर राधावल्लभ लाल को प्रतिष्ठित किया।

श्रीमहंत लाड़िली शरण महाराज ने कहा कि हरिवंश महाप्रभु रस भक्ति धारा के उत्सकार व भक्ति मार्ग के नवोन्मेषक थे। उन्होंने रस भक्ति को ब्रज भाषा का आकर्षक उपास्य बनाया। साथ ही उन्होंने समाज संगीत की परिपाटी का शुभारम्भ किया।

वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. गोपाल चतुर्वेदी ने कहा कि राधावल्लभ सम्प्रदाय का मध्यकालीन हिन्दी साहित्य में मात्रा और गुणवत्ता दोनों ही दृष्टियों से अतुलनीय योगदान है।हरिवंश महाप्रभु की नाम वाणी,लीला, धाम और उपासना आदि के क्षेत्र में अनेकों महानतम व मौलिक देनें हैं।उन्हीं ने ब्रज वृन्दावन में रास मंडल, सेवाकुंज, वंशीवट,धीर समीर, मानसरोवर, हिंडोला स्थल, श्रृंगार वट और वन विहार नामक लीला स्थलों को प्रकट किया।

इस अवसर पर श्रीहित हरिवंश महाप्रभु का जन्मोत्सव अत्यंत धूमधाम व गाजे-बाजे के साथ मनाया गया। बधाइयां गाईं गईं। मेवा-मिष्ठान, खिलौने, बर्तन, वस्त्र, रुपए आदि लुटाए गए। 

आयोजन में मुख्य यजमान कृष्णा अग्रवाल, राजू गोटे वाले,  दीपक अग्रवाल, श्रीहित परमानंद शोध संस्थान के संस्थापक अध्यक्ष श्रीहित विष्णुमोहन नागार्च, युवा साहित्यकार डॉ. राधाकांत शर्मा, भागवताचार्य ललित वल्लभ नागार्च,भागवताचार्य हरेकृष्ण शर्मा "शरद", सार्थक अग्रवाल, प्रद्युम्न अग्रवाल व सर्वेश्वर अग्रवाल आदि की उपस्थिति विशेष रही। 

TAAZA BULLETIN विशेष

श्री हनुमान जी की आरती ।

  श्री हनुमान जी की आरती आरती कीजै हनुमान लला की। दुष्ट दलन रघुनाथ कला की॥ जाके बल से गिरिवर कांपे। रोग दोष जाके निकट न झांके॥ अंजनि पुत्र म...